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अल-ज़वाहिरी का खात्मा पर परिवार को नहीं आई खरोच, अमेरिका ने किया खास तकनीक का इस्तेमाल

काबुल

काबुल में छिपे अल-क़ायदा के मुखिया अयमन अल-ज़वाहिरी के खात्मे को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ने मोटी रकम के बदले इस ऑपरेशन में अमेरिका की मदद की। अमेरिका ने इस ऑपरेशन की तैयारी काफी समय पहले ही कर ली थी। अमेरिकी सेना ने आतंकी को ढेर करने के लिए ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया कि उसके घर में मौजूद अन्य सदस्यों को खरोच तक नहीं आई। घर के आसपास भी किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। एक धमाके ने केवल अल-जंवाहिरी को मौत की नींद सुला दिया।

अमेरिकी सेना की खास तकनीक, जिससे मारा गया आतंकी
सोचने वाली बात है कि आखिर अमेरिकी सेना ने कौन सी तकनीक का इस्तेमाल किया कि उसका निशाना इतना सटीक था। पहले कई बार ऐसा हो चुका है कि अमेरिकी सेना का निशाना चूका और फिर मासूम लोगों की जान चली गई। लेकिन इस बार ड्रोन से निकली मिसाइल ने सीधा लक्ष्य को भेदा। अमेरिका ने अल-ज़वाहिरी को मारने के लिए ड्रोन से हेलफायर मिसाइल दागे थे।

क्या है हेलफायर मिसाइल
अल-ज़वाहिरी को मारने केलिए ऐसी मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था जो कि लेजर तनकीक से निशाना लगाती है। इस मिसाइल को मानवरहित ड्रोन से दागा गया। बताया जाता है कि बगदाद में ईरानी सेना के जनरल कासिम सुलेमानी को इसी तकनीक से मारा गया था। इस मिसाइल को विमान, हेलिकॉप्टर, किसी वाहन से भी दागा जा सकता है। इस बार मानवरहित ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। दूर बैठा ऑपरेटर ड्रोन को संचालित कर रहा था और कैमरे के जरिए अल-जवाहिरी पर नजर रख रहा था। अल-जवाहिरी जैसा ही बालकनी में आया, लक्ष्य साध दिया गया। लेजर किरण आतंकी पर पड़ी और मिसाइल सीधा लक्ष्य पर गिर गई।

जानलेवा साबित हुई अल-ज़वाहिरी की एक आदत
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक अल-ज़वाहिरी की जीवनचर्या पर लंबे समय से नज़र रखी जा रही थी। खुफिया विभाग ने उसका पूरा खाका बना लिया था। अल-ज़वाहिरी एक निश्चित समय पर अपनी बालकनी में बैठता था। हवाई हमले का प्लान कुछ इस तरह से तैयारी किया गया कि केवल आतंकी को ही निशाना बनाया जाए। बाकी इमारत को कोई नकुसान न पहुंचे। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ड्रोन और एयरक्राफ्ट उस जगह पर नजर बनाए हुए थे। जब वह बालकनी में आया तभी ड्रोन से लक्ष्य को लॉक कर दिया गया। लेजर किरण अलजवाहिरी पर पड़ी और फिर मिसाइल ने उसे उड़ा दिया। इस हमले में केवल बालकनी में ही तोड़-फोड़ हुई।

अमेरिका के 9/11 के हमले में अल-जवाहिरी ओसामा बिन लादेन के साथ था। लादेन की मौत के बाद अल-कायदा की कमान उसके हाथ में थी। बिन लादेन के मारे जाने तक भी आतंकी संगठन में उसकी नंबर दो की हैसियत थी। इस तरह चार राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में आतंकी को मारने की कोशिश की गई लेकिन सफलता अब जाकर मिली। बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद हक्कानी नेटवर्क की मदद से अल-जवाहिरी काबुल पहुंचा था और यहीं रहने का ठिकाना बना लिया था।

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