मध्य प्रदेश

नगर निगम की सफाई व्यवस्था चरमराई

 मलेरिया, डेंगू ने पांव पसारे

काल चिंतन कार्यालय
वैढ़न,सिंगरौली। नगरीय निकाय चुनाव के बाद नगर पालिक निगम सिंगरौली कूटनीति व राजनीति का अड्डा बन गया है। जनता ने आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती रानी अग्रवाल को महापौर बना दिया। इसके बाद भाजपा, कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के बीच खींचतान शुरू हो गयी। पूर्व कमिश्रर आर.पी. सिंह के अचानक निधन के बाद नये कमिश्रर ने पद्भार जरूर ग्रहण कर लिया है लेकिन नगरीय व्यवस्था को समझने में उन्हें समय लग रहा है। जिसके कारण मूलभूत कार्यवाइयां भी हासिए पर हो गयी हैं। जिन ठेकेदारों ने काम कर लिये हैं। उनका भुगतान तक नहीं हो पा रहा है।

मूलभूत जरूरतों की कार्यवाहियों में सबसे पहला नाम सफाई व्यवस्था का आता है। निगम की नयी व्यवस्था के तहत सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है। जिसके कारण पूरे नगरीय क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के मच्छरों की भरमार हो गयी है। इनकी संख्या इतनी ज्यादा हो गयी है कि कितना भी दरवाजा बंद करो ये अंदर आ ही जा रहे हैं। जिसके कारण नगरीय क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया का प्रकोप सिर चढ़कर बोल रहा है। नगर के कुल 45 वार्डांे में सफाई व्यवस्था इतनी दयनीय हो गयी है कि जगह-जगह कूड़े करकटों की सड़ांध से लोग परेशान हैं एवं मच्छरों की आबादी बेतहाशा बढ़ चुकी है।

नगर निगम में सफाई व्यवस्था के मद्देनजर सफाईकर्मियों की कमी एक अर्से से है। जब डा. विनय सिंह सफाई व्यवस्था के अधिकारी थे तब सफाई कर्मियों को सैकड़ो की संख्या में हायर किया गया था। महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल बताती हैं कि उन्होने सफाई कर्मियों को हायर करने के लिए एक प्रस्ताव कमिश्नर के पास भेजा है लेकिन जहां तक जानकारियां बताती हैं कि अभी तक उस प्रस्ताव का क्रियान्वयन अभी तक नहीं हो पाय है जिसके कारण महामारियां अपना पैर पसार रही हैं। बच्चों से लेकर वृद्धों तक को समेट रही मलेरिया, डेंगू बीमारी अब जानलेवा बनती जा रही है।

चुनाव के बाद जिस तरह के परिणाम आये हंै, जिस तरह के पदाधिकारी चयनित हुये हंै उनमें अनुभव का सर्वथा आभाव देखा जा रहा है। नये नये पार्षद आ गये हैं जिन्हें अभी कुछ नहीं आता। मजे की बात यह है कि 45वार्डों में कुल 26 महिला पार्षद चुनी गयी हैं। इन गृहणियों ने अभी तक नगर निगम की देहलीज नहीं पार की है। इनके पतिदेव प्रस्तावों की फाईल लिये नगर निगम के दफ्तर में चक्कर लगाते रहते हैं। नगरीय व्यवस्था में महिलाओं की भागेदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आरक्षण दिया था ताकि प्रबुद्ध महिलाएं आगे आयें और व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पुरूषों से कंधे से कंधा मिलाकर अपनी भागेदारी सुनिश्चित करें। लेकिन ऐसा कुछ दिखायी नहीं दे रहा है। कहते हैं कि नगर को स्वच्छ रखने के लिए नगर प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों की भी जिम्मेदारी होती है और इस जिम्मेदारी का वहन अच्छे तरीके से महिलाएं कर सकती हंै। बशर्तें उन्हें अपने घर की देहलीज को पार करके सड़क पर आना होगा।
बहरहाल लोग सफाई व्यवस्था की दुर्दशा से त्रस्त हैं। हर घर में मच्छरों का रोना रोया जा रहा है।

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