मध्य प्रदेश

कितनी सस्ती है जिंदगी यहाँ

 

आर.के.श्रीवास्तव
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काल चिन्तन,सिंगरौली। आप सड़क पर चल रहे हैं पता नहीं कब कौन ठोकर मार के निकल जाये और आपकी जिंदगी खत्म हो जाये, कहा नहीं जा सकता। ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध सिंगरौली में वर्षांे से यही हो रहा है। वाहन तेज रफ्तार से चलते हैं चालक अकुशल होते हैं। ज्यादा ट्रिप लगाने की मारामारी होती है। यातायात के नियमो का उल्लंघन होता है। इन सारे कारणों के चलते सिंगरौली में अकाल, तत्काल मौते हो रही हैं। प्रशासनिक उपेक्षाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कहीं सड़कों पर गड्ढे हैं तो कहीं गड्ढों में सड़क है। कहीं इतना कोयला और धूल उड़ रही है कि आर-पार नहीं देखा जा सकता। भारी वाहन तेज रफ्तार से जब आपके बगल या सामने से गुजरता है तो वो जो धूल का गुब्बार छोड़ता हुआ जाता है उससे कुछ देर तक आगे पीछे दिखायी नहीं देता। दुर्घटनाएं प्रदूषण के कारण भी हो रही हैं।

सड़क पर मौत होती है। किसी घर का चिराग बुझता है। किसी माँ का बेटा, या पत्नी का पति, या बेटे का बाप चिर निद्रा में सो जाता है तो परिजनों तथा पब्लिक के पास बवाल काटने के अलावा कोई चारा नहीं होता। प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस पहुंचते हैं, बवाल को धीरे धीरे ठण्डा करते हैं। कीमती जिंदगी की एवज में चन्द रूपये थमा कर कर्तव्यों से च्युत हो जाते हैं। दुर्घटना घटित होने के बाद यह क्रिया ट्रेंड बन गयी है। पिछले चन्द दिनों पहले वैढ़न साशन मार्ग पर एक तेज रफ्तार रेत वाहक ट्रैक्टर ने एक घर के उदीयमान सूरज को अस्त कर दिया। नीरज द्विवेदी अस्पताल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के बाद अपने घर जा रहे थे कि यातायात के नियमों की धज्जियां उड़ाता हुआ रेतचोर ट्रैक्टर ने उसे सामने से ठोकर मार दी। नीरज की तत्काल मौत हो गयी। पब्लिक ने बवाल काटा, प्रशासन पहुंचा, एक लाख रूपये अदा करके घटना का पटाक्षेप कर दिया गया।

सिंगरौली जिले मेें सड़क पर होने वाली अकाल मौतों का आंकड़ा हर वर्ष बढ़ रहा है। वो कहते है न कि घटना हो जाने के बाद प्रशासन अपनी जिम्मेदरी निभाता है। घटना के कारणों पर स्थायी काम किया जाता है। प्रशासन ने तो स्थायी काम किया होगा लेकिन नतीजे कुछ और ही बता रहे हैं। वर्ष २०२० में सड़क पर हादसों में ६८ मौते हुयी थीं, वर्ष २०२१ में यह आंकड़ा ८१ तक पहुंच गया। प्रशासन और ज्यादा चौकन्ना हुआ तो २०२२ में यह आंकड़ा बढ़कर १२७ मौतो तक पहुंच गया। एक आंकड़े के अनुसार जनवरी से लेकर नवंबर तक ४६३१ सड़क दुर्घटनाएं हुयी हैं जिसमें से १२७ लोग मरें जबकि १०२३ लोग गंभीर रूप से घायल हुये। कोयला वाहक भारी वाहनों पर दबाव होता है कि ट्रिप ज्यादा लगायी जाये। नियमों को तॉक पर रखकर ओवरलोड किया जाये। पूरे जिले में हर थानों में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन हो रहा है और यह परिवहन ज्यादातर ट्रैक्टरो द्वारा किया जा जा रहा है। अगर इमानदारी से जांच किया जाये तो इन ट्रैक्टरों को चलाने वाले ज्यादातर नाबालिग मिलेंगे जो रेत को लादकर अनियंत्रित गति से अपने नियत स्थान पर पहुंचते हैं ओर खाली ट्रैक्टर को लगभग उड़ाते हुये नियत स्थान पर पहुंच जाते हैं।  एक आंकड़े के अनुसार अभी तक लगभग पचास मौते खनिज परिवहन करने वाले वाहनों से सड़कों पर हुयी हैं। सड़कों पर हो रही अकाल मौते प्रशासन के सामने कड़ी चुनौती हैं।

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