मध्य प्रदेशराजनीति

भ्रष्टाचार का जनक: राजनीतिक हस्तक्षेप

पाँच साल बाद बिहार बनेगा मध्य प्रदेश,पुलिसिया कहानी

आर.के.श्रीवास्तव
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काल चिन्तन,सिंगरौली। मप्र की पुलिस पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही है। इसका कारण राजनीतिक हस्तक्षेप है। बबुआ से लेकर ददुआ तक के नेता प्रभारियों को फोन करते हैं इसको छोड़ दो और इसको उठा लो, पुलिस उन्हीं की तर्ज पर काम करती है। आने वाला पाँच साल मध्य प्रदेश को अपराध की दृष्टि से बिहार बना देगा। एक टीआई ने मुझसे कहा कि वो दिन आने वाला है जब वो थाने में बैठा रहेगा और दो आदमी घुसेंगे, एक आदमी उनकी माँ बहन करेगा और उन्हें दो चार थप्पड़ देगा। गुस्से में आकर जब टीआई मारने वाले और गाली देने वाले को पीटना शुरू करेगा तो दूसरा आदमी उसका वीडियो बनायेगा। वीडियो वायरल होगा और यह कहा जायेगा कि यह देखिए टीआई कैसे आम नागरिक की पिटाई कर रहा है।

हंसिए मत, यह होने वाला है। जब थाने में, पुलिस चौकियों में राजनीतिक हस्तक्षेप से पोस्टिंग की जायेगी। पैसा लेकर पोस्टिंग की जायेगी। पैसा मांगा जायेगा तो पुलिस क्या करेगी? पुलिस धन उगाही करेगी। थाने और चौकियों का सिपाही रोड पर खड़ा होकर गाड़ियों को खड़ा करेगा। इंट्री लेगा, पूरे इलाके में शराब बिकेगी, गांजा बिकेगा, स्मैक और हेरोईन बिकेगी, तभी न पैसा आयेगा। नेता जी को तो पैसा देने के लिए यह सब करना पड़ेगा। आम जनता का क्या होगा? सिंगरौली के सुदूर ग्रामीण अंचलों से जब आदिवासी अपनी समस्या को लेकर आयेगा तब चौकी प्रभारियों और थाना प्रभारियों के पास उसे सुनने के लिए समय नहीं होगा क्योंकि उन्हें नेता जी को धन देने के लिए जुटाना है। क्षेत्र में हत्याएं होंगी तो पुलिस विभाग के आला अधिकारी कहेंगे, जीरो टॉलरेंस का पालन करो। हत्या का सुराग कैसे मिलेगा? क्या यह कहने से मिलेगा कि बेटा जिस चाकू से तुमने हत्या की है वह चाकू लाकर हमको दे दो। आप कल्पना कर सकते हैं कि वह चाकू लाकर प्यार से बोलने पर थानेदार साहब को थमा देगा। अगर थर्ड गिड्री का प्रयोग हत्या का सुलझाने के लिए करे तो बात मानवाधिकार की आ जाती है। किसी भी चोरी के मामले में अगर दस लोगों को पूछताछ के लिए बैठा लिया जाये तो छुटभैये नेता पहुंच जाते हैं। यहां भी राजनीति होती है। नौकरी बचानी है तो कुछ भी करना पड़ेगा। नतीजा क्या होगा, मध्य प्रदेश बिहार बन जायेगा।

सिंगरौली जिले में अवैध शराब, अवैध गांजा, हेरोईन, ब्राउन सुगर धड़ल्ले से बिक रहा है। विभाग से पूछा जाये तो जवाब मिलता है कि कार्यवाहियां हो रही हैं। सच्चाई यह है कि विभाग के लोग नेताओं को खुश करने में लगे हंै ताकि उनकी नौकरी बची रहे। रेत के अवैध टै्रक्टर रात भर धड़ल्ले से चल रहे हंै, कोई कार्यवाही नहीं हो रही है क्योंकि टीआई सोचता है कि उसकी नौकरी बची रहे। अमुक ट्रैक्टर, अमुक भाजपाई छुटभैय्ये का है। अमुक ट्रैक्टर कांग्रेस या आम आदमी पार्टी के छुटभैय्ये का है। इन्हें तो बचाना ही होगा ना। तब बताईये भारत के संविधान का पालन कैसे होगा?

सिंगरौली जिले में एक सिपाही की भी पोस्टिंग पीएचक्यू से हो सकती है। बशर्ते उसकी पहुंच हो। एसपी, डीआईजी, आईजी की तो बात ही छोड़िये अब पहुंच की बात नेता पर आकर टिकती है। यहां भी भ्रष्टाचार की तह में नेता ही है। एक जिम्मेदार पुलिस उपनिरीक्षक ने कहा कि जब मंत्री का पावर विधायक को दे दिया जाये तो खुल्ही लूट को कोई रोक नहीं सकता। यहां बैठे पुलिस प्रभारियों को पत्रकार से लेकर नेता तक को प्रतिमाह पैसा देना पड़ता है। तब वह दो रोटी खाकर अपने घर में शांति से सो पाता है।

डाक्टर सम्पूर्णानन्द, आचार्य क्रिपलानी, लाल बहादुर शास्त्री, बाबू जगजीवन राम का जमाना लद गया। महंगाई धुआंधार बढ़ रही है। लेकिन मत उन्हीं को दिया जा रहा है। राजनीतिक हस्तक्षेप उपरोक्त चरित्र वाले राजनेताओं का सुदृढ़ होता था, सापेक्ष होता था। निहीत स्वार्थ वाला नहीं होता था इसलिए बात आने पर ये लोग अपना त्यागपत्र दे देते थे। वो जमाना लद गया। अब तो प्रभारी मंत्री जी हो, सांसद हों या विभागीय मंत्री हों, सबकी अगवानी करने के लिए विभागीय कर्मचारी पचास किलोमीटर दूर पहुंचकर खड़ा रहता है। अटैची भरी जाती है और चढ़ोत्तरी दी जाती है। जिन मताधिकारों से ये लोग पदारूढ़ हुये हैं उन मतदाताओं की हालत गंभीर है। चाहे विस्थापन हो, चाहे खेती हो, मनरेगा में काम हो, मजदूरी हो या भुखमरी हो, आम जनता को इसे बर्दाश्त ही करना होगा क्योंकि भारत की ऐसी जनता सदियों से यह सब बर्दाश्त करती जा रही है।

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