मध्य प्रदेश

दुर्व्यवस्था के कचरे से जूझ रहा प्रधानमंत्री आवास

वैढ़न,सिंगरौली। प्रधानमंत्री आवास केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। यह योजना म.प्र. के सिंगरौली जिले में भ्रष्टाचार का शिकार है। सिंगरौली जिले का दुर्भाग्य है कि विकास की गति में किसे भ्रष्टाचार से दो चार होना पड़ता है। सिंगरौली जिले के प्रधानमंत्री आवास योजना में तत्कालीन प्रभारी ने जो स्वेच्छाचारिता की उसका भोगदण्ड उसको भी मिला। साथ-साथ में वह भोगदण्ड सिंगरौली वासियों को भी मिल रहा है। आज की स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री आवास परिक्षेत्र में आवंटित आवासों में लगभग पचास प्रतिशत लोग ताला बंद करके अपने खुद के आवासों में रह रहे हैं। तथ्य यह है कि जो लोग प्रधानमंत्री आवासों को बुक किये हुये हैं लेकिन उसमें रहते नहीं हैं। वे क्या प्रधानमंत्री आवास के पात्र हैं? प्रधानमंत्री आवास के आवंटन में की गयी कथित स्वेच्छाचारिता का यह स्पष्ट उदाहरण है। नगर पालिक सिंगरौली में पदस्थ जनप्रतिनिधि तथा कमिश्नर इस बात के उत्तरदायी हैं कि आज की तरीख में प्रधानमंत्री आवासीय परिसर में पानी की उपलब्धता नहीं है।

बताते हैं कि प्रधानमंत्री आवासीय परिसर में पानी संग्रहण के लिए तीन अंडरग्राउण्ड टंकिया हैं जोकि इस भीषण गर्मी में भर नहीं रही हैं। एक नगर निगम के अधिकारिक सूत्र के अनुसार निगम क्षेत्र में पानी की आपूर्ति के लिए जो डीपी बनायी गयी थी वही त्रुटिपूर्ण है। प्रधानमंत्री आवास को पानी पहुंचाने के लिए नवानगर से नौगढ़ और नौगढ़ से देउरा होकर पानी प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया में प्राधनमंत्री आवासी परिसर में पानी का फ्लो इतना धीमा होता है कि अंडरग्राउण्ड टंकियां भर नहीं पाती और लोगों को पानी नहीं मिल पाता है। नगर पालिक निगम में जो भी योजनाओं का क्रियान्वयन हुआ है वह सापेक्ष नहीं है।कहीं न कहीं से उसमें व्यक्तिगत स्वार्थ, जातिगत स्वार्थ, राजनीतिक स्वार्थ घुसा रहता है।

प्रधानमंत्री आवास में रहने वाले लोगों ने कई बार कलेक्टर सिंगरौली को और कमिश्नर नगर निगम को ज्ञापन देकर अपनी समस्याओं से उनको अवगत कराया लेकिन हैरत यह है कि कलेक्टर को इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन को लेकर कान पर जूं नहीं रेंगती। नवआगन्तुक कमिश्रर को भी समझ में नहीं आ रहा है कि वह प्रधानमंत्री आवासीय क्षेत्र में बरकरार समस्याओं के निराकरण के लिए क्या करें? प्रधानमंत्री आवास के क्षेत्र की स्थिति यह है कि अगर कोई अपने आवासीय परिसर के बाहर यदि एक जूता, चप्पल रात में छोड़ देत है तो वह सबेरे नहीं मिलता। चोरों और कबाड़ियों का इतना बड़ा आक्रमण प्रधानमंत्री आवासीय क्षेत्र में है कि लोग अपने सामानों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। अभी एक बजट आयी थी। पता चला है कि पाँच लाख रूपये की बजट आयी थी। आवासीय परिसर के लोगों की मांग थी कि इस बजट में आवासीय परिसर की बाउंड्रीवाल की जाये लेकिन प्रशासन की इच्छाशक्ति की छिड़ता का इससे बड़ा उदाहरण नहीं मिल सकता की आजतक प्रधानमंत्री आवासीय परिसर की सुरक्षा के लिए एक बाउंड्रीवाल करवाया जा सके।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह गाते रहते हैं कि उन्होने देश में इतने प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण करवाया लेकिन आवासीय परिसर में जिन मुलभूत आवश्यकताओं की जरूरत होती है वह शासन की तरफ से मुहैया नहीं करवायी जा सकी। सिंगरौली का प्रधानमंत्री आवासीय परिक्षेत्र में आवंटित पचास प्रतिशत लोगों द्वारा अपने आवासों का उपयोग पिकनिक स्पॉट के रूप में किया जाता है। अपने घर से लोग आते हैं और प्रधानमंत्री आवास में मुर्गा दारू होता है। यह नगर निगम क्षेत्र के उन उत्तरदायी लोगों की सोच का परिणाम है कि आज इस महत्वाकांक्षी योजना की तेरही हो गयी है। योजना सिंगरौली में औधे मूंह गिरकर पसर गयी है।

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