मध्य प्रदेश

सोशल मीडिया में चल रही खबरों का भाजपा नेता प्रवीण तिवारी ने किया खंडन, खूद को बताया बेकसूर

कहा-उनके द्वारा बिक्री की गयी ट्रक का खरीददार के नाम ट्रांसफर न होने से उनके नाम पर दर्ज हुआ था मामला, विरोधियों की साजिश की वजह से क्षवि को पहुंचा गहरा आघात

 

काल चिंतन कार्यालय
वैढ़न,सिंगरौली। भाजपा नेता व पूर्व जिला उपाध्यक्ष प्रवीण तिवारी ने आज माजन मोड़ स्थित सर्किट हाउस में उनके खिलाफ सोशल मीडिया में चल रही खबरों पर पत्रकारों के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होने बताया कि सोशल मीडिया में लगातार खबरे चल रही हैं कि प्रवीण तिवारी झारखंड के वारंटी हंै तथा उनके ऊपर गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है। इससे उनकी क्षवि को गहरा आघात पहुंचा है। उन्होने बताया कि यह सच है कि उनके ऊपर झारखंड में मामला दर्ज है परन्तु वह मामला २०१० का है जब उन्होने एक ट्रक खरीदा, चार महीने चलाने के बाद सरोज दुबे पिता राधाकृष्ण दुबे निवासी मेढ़ौली को बेच दिया। सरोज दुबे ने उक्त ट्रक तथा तीन अन्य अपने ट्रकों को उड़ीसा में किसी ट्रांसपोर्ट कंपनी को दे दी। कुछ ही दिनों बाद किसी कारण बस झारखंड में मे उक्त ट्रक पुलिस द्वारा पकड़ ली गयी। उस दौरान गाड़ी ट्रांसफर नहीं हो पायी थी। स्टाम्प पेपर पर ही ट्रक की बिक्री की गयी थी। प्रवीण तिवारी ने बताया कि जब सरोज दुबे की ट्रक झारखंड में पकड़ी गयी उस दौरान वह ट्रक प्रवीण तिवारी के नाम ही थी जिस कारण मामला प्रवीण तिवारी के विरूद्ध दर्ज हुआ। श्री तिवारी ने बताया कि बाद में जब उन्होने अपना पक्ष रखा तो वहां से उन्हें बरी कर दिया गया।

उन्होने कहा कि वह ट्रक वहां पर चार साल तक खड़ी थी। उसके बाद उसे छुड़ाया। गाड़ी कहां गयी पता नहीं चला। उसका लोन ५२ लाख रूपये हो गया था। जिसका सेटलमेंट उन्होने अपनी जमीन बेंचकर १८ लाख रूपये देकर कराया गया। उन्होने बताया कि गाड़ी भी चली गयी लोन भी देना पड़ा और वह अपराधी भी बन गये। उन्होने बताया कि इस दौरान उनके पास या मोरव थाने में झारखंड से नोटिस, वारंट कुछ नहीं आया। इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं थी। सोशल मीडिया से पता चला कि मामला समाप्ति पर था परन्तु इसे रिओपन कराया गया है। उन्होने बताया कि कोर्ट में जब मैने साक्ष्य प्रस्तुत किया तब मुझे मुक्त किया गया।

प्रवीण तिवारी ने बताया कि जब चुनाव लड़ रहे थे, जब मंडल अध्यक्ष की दावेदारी कर रहे थे तब यह मामला मेरे विरोधियों के द्वारा उछाला गया। उन्होने बताया कि जब मोरवा में कोयले में भस्सी मिलाने क मामले को लेकर उन्होने एक पत्र राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण लोगों को लिखा। इसपर कुछ लोगों को नेाटिस भी गया था तब कुछ लोग बौखलाहट में इस मामले को तूल दिलवाते रहे। उन्होने बताया कि प्रवीण तिवारी के नाम पर मुकदमा कायम हुआ था परन्तु उसमें वह इनवालमेंट नहीं रहे। उन्होने बताया कि उनके विरोधियों के द्वारा उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उन्होने बताया वर्तमान में कोयले में भस्सी मिलाने का कार्य बंद है यदि यह कार्य पुन: प्रारंभ होता है तो वह पुन: इसका विरोध करेंगे चाहे उन्हें इसके लिए कोई कुर्बानी देनी पड़े।

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