मध्य प्रदेश

सिंगरौली में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मियां, दावेदारों के छूट रहे पसीने

गली मुहल्लों में चल रहा कयासों का दौर, चौपालों में हो रहे हार जीत के फैसले

नीरज पाण्डेय
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काल चिन्तन,सिंगरौली। मप्र में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता अब कुछ ही दिनों में लगने वाली है। संभावित प्रत्याशियों की धड़कने तेज हो गयी हैं। चुनाव से पहले टिकट के लिए तमाम दावेदार भोपाल से लेकर दिल्ली तक चक्कर लगा रहे हंै। सिंगरौली जिले में चुनाव की भी चर्चा तेज हो गयी है। जहां चार लोग जुट रहे हैं वहां सिर्फ चुनाव की ही चर्चा हो रही है। अभी सबका फोकस चुनाव में हार जीत से ज्यादा टिकट पर दिखायी दे रहा है। भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पाटी्र, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी प्रत्याशी चयन में जुटी हुयी हैं। सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोले सिंगरौली जिले का तो अभी फैसला नहीं हुआ परन्तु प्रदेश के ७८ विधानसभा सीटों में प्रत्याशियों की घोषणा हो गयी है। भाजपा द्वारा इस बार मौजूदा विधायकों का टिकट काटकर नये चेहरों को वरीयता दी जा रही है जिससे भाजपा प्रत्याशियों के हाथ पॉव फूलने लगे हैं। भाजपा मप्र में लम्बे समय से सत्ता में है। बीच में कांग्रेस की कुछ दिनों की सरकार रही परन्तु वह चल नहीं सकी और भाजपा ने पुन: वापसी कर ली इस कारण भाजपा को एंटी इंकंबेंसी भी एक बड़ा फैक्टर चुनाव में देखने को मिल सकता है। सिंगरौली जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं जिसमें लम्बे समय भाजपा ही काबिज रही। सिगरौली, देवसर, चितरंगी इन तीनों विधानसभाओं में वर्तमान में भाजपा के विधायक हंै परन्तु नगर पालिक निगम के चुनाव में जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने दिग्गजों को धूल चटायी उससे इस बार के विधानसभा चुनाव में कई तरह के कयास लगाये जा रहे हैं। फिलहाल भाजपा से वर्तमान विधायक रामलल्लू वैश्य, चंन्द्रप्रताप विश्वकर्मा, रामनिवास शाह, विरेन्द्र गोयल संजीव अग्रवाल के नाम सिंगरौली विधानसभा के लिए भाजपा से सुर्खियों में बताये जा रहे हैं। वहीं देवसर से वर्तमान भाजपा विधायक सुभाष वर्मा, पूर्व विधायक राजेन्द्र मेश्राम का नाम टिकट की दौड़ में चल रहा है। चितरंगी विधानसभा की बात करें तो भाजपा विधायक अमर सिंह व पूर्व मंत्री स्व. जगन्नाथ सिंह के बेटे डा. रविन्द सिंह व बहू श्रीमती राधा सिंह का नाम टिकट की दौड़ में सुनने को मिल रहा है। भाजपा से टिकट के लिए कई और दावेदार हैं जो दबी में अपनी गोटी फिट करने की फिराक में बताये जा रहे हैं। ऊँट किस करवट बैठेगी यह तो वक्त ही बतायेगा परन्तु चौक चौराहों की चौपालों पर आजकल खुलेआम टिकट का वितरण किया जा रहा है।
कांग्रेस पार्टी अपने पत्ते भाजपा के बाद खोलने के मूड में है। कांग्रेस पार्टी में भी दावेदारों की एक लम्बी लिस्ट है। सिंगरौली विधानसभा से पूर्व महापौर श्रीमती रेनू शाह, जिलाध्यक्ष शहर अरविन्द सिंह चन्देल, अमित द्विवेदी, मनोज दुबे, रामशिरोमणि शाहवाल, ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू सहित अधे दर्जन से अधिक नाम सुर्खियों में चल रहे हंै। वहीं कांग्रेस द्वारा देवसर विधानसभा में पूर्व मंत्री वंशमणि वर्मा, बालेन्द्र वर्मा सहित आधे दर्जन नाम दौड़ में चल रहे हैं। वहीं बात करें चितरंगी विधानसभा की तो वहां कांग्रेस की पूर्व विधायक श्रीमती सरस्वती सिंह, पूर्व सांसद मानिक सिंह का नाम टिकट की दौड़ में तेजी से चल रहा है।

आम आदमी पार्टी अभी अपने पत्ते खोलने के मूड में नहीं है। इसके बावजूद पार्टी द्वारा चुनाव प्रचार व जनसंपर्क बड़ी तेजी से किया जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी तथा भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी भाजपा व कांग्रेस द्वारा जैसे ही प्रत्याशी घोषित किया जाता है उसके बाद अपने प्रत्याशी घोषित करने की तैयारी में हैं। भाजपा व कांग्रेस पार्टी के जो असंतुष्ट निकलेंगे उन्हें मौका देने से भी सपा व बहुजन समाज पार्टी टिकट देने में गुरेज नहीं करेंगी।

सिंगरौली जिले में जातीय समीकरण, विकास, प्रत्याशी चयन अहम मुद्दे हैं। जिले में लम्बे समय से कांग्रेस पार्टी सत्ता में नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी लगातार चुनाव में विजयी हो रहे हैं इसे देखते हुये एंटी इंकंबेंसी एक बड़ा फैक्टर देखने को मिल सकता है। सिंगरौली जिले में लम्बे समय से जीत का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस जहां एड़ी चोटी का जोर लगा रही है वहीं भाजपा जिले में अपना दबदबा कायम करने के लिए हर जुगत करने से पीछे नहीं हट रही है।

प्रदेश में आम आदमी पार्टी व कांग्रेस पार्टी के बीच गठबंधन की चर्चा भी जोर शोर से चल रही है। कांग्रेस यदि आम आदमी पार्टी के साथ चुनाव में गठबंधन करती है तो जो कांग्रेस का वोट आम आदमी काटती है वह उसे मिल जायेगा और कांग्रेस पार्टी की सीटों में बढ़ोत्तरी हो सकती है।  परन्तु आम आदमी पार्टी यदि काग्रेस के साथ गठबंधन करती है तो उसे अवश्य ही कांग्रेस पार्टी को कुछ सीटे देनी पड़ेंगी। आम आदमी पार्टी की अगर बात करें तो पूरे प्रदेश में सिंगरौली जिले के अंदर उसकी महापौर व कई पार्षद साथ ही नगर परिषद बरगवां में उपाध्यक्ष व कई पार्षद हैं ऐसे में यदि गठबंधन होता है तो आम आदमी पार्टी सिंगरौली से सीट की मांग जरूर करेगी। यदि आम आदमी पार्टी को कांग्रेस पार्टी सिंगरौली की सीट देती है तो सिंगरौली विधानसभा में लम्बे समय से जनसंपर्क कर रहे कांग्रेस पार्टी के संभावित प्रत्याशियों को एक गहरा झटका जरूर लगेगा। फिलहाल ऊंट किस करवट बैठती है यह तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन उससे पहले सिंगरौली जिले की तीनों विधानसभा सीटों से जिस तरह प्रत्याशी भोपाल से लेकर दिल्ली की दौड़ लगा रहे हंै उससे राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है।

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