मध्य प्रदेश

मप्र की इन पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा कांग्रेस का मुकाबला होगा दिलचस्‍प

भोपाल

मध्‍य प्रदेश राज्य में मुख्य लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. ऐसे में सभी की निगाहें उन प्रमुख सीटों पर हैं, जिन पर 17 नवंबर को मतदान होना है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में पांच ऐसी हाई प्रोफाइल सीटें हैं. बुधनी विधानसभा सीट पर सीएम शिवराज सिंह चौहान चुनाव मैदान में हैं. सीएम शिवराज 1990 में पहली बार विदिशा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली बुधनी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. इसके बाद 2006, 2008, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में वह लगातार इस सीट से चुनाव जीतते रहे. 2018 में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को 58,999 वोटों से हराया था. शिवराज के सामने कांग्रेस ने रामायण में हनुमान का किरदार निभाने वाले टीवी एक्टर विक्रम मस्तल को मैदान में उतारा है. जिससे चुनावी लड़ाई दिलचस्प हो गई है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमल नाथ छिंदवाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं. छिंदवाड़ा में कमलनाथ की मजबूत पकड़ है. उन्होंने मई 2019 में विधानसभा चुनाव 25,800 से अधिक मतों के अंतर से जीता। उनके दशकों लंबे राजनीतिक करियर को छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से उनकी रिकॉर्ड नौ जीत से चिह्नित किया गया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के खिलाफ विवेक बंटी साहू को मैदान में उतारा है. कमल नाथ को घेरने के लिए केंद्रीय मंत्री समेत सभी स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया गया है. कांग्रेस की ओर से कमल नाथ के प्रचार की कमान उनके सांसद बेटे नकुल नाथ और उनकी पत्नी प्रिया नाथ संभाल रहे हैं, जबकि पूरे राज्य में चुनाव प्रचार की कमान कमल नाथ संभाल रहे हैं.

ओबीसी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल को नरसिंहपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है. बीजेपी इस क्षेत्र में अपना गढ़ सफलतापूर्वक बरकरार रखने में कामयाब रही है. जिसमें प्रह्लाद पटेल के भाई जालम सिंह ने 2013 और 2018 के चुनाव में जीत हासिल की थी. ऐसे में प्रह्लाद सिंह की उम्मीदवारी से नरसिंहपुर में बीजेपी की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है. प्रह्लाद सिंह पटेल ने खुद को मध्य प्रदेश में उमा भारती के बाद सबसे बड़े लोधी नेता के रूप में स्थापित कर लिया है.

भाजपा ने वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर-1 से चुनाव मैदान में उतारा है, जहां वर्तमान में कांग्रेस के संजय शुक्ला विधायक हैं। 2008 और 2013 में बीजेपी की ओर से यह सीट जीतने के बाद बीजेपी ने इस सीट पर अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए राजनीतिक क्षत्रपों को चुनावी मैदान में उतारा है. छात्र राजनीति से अपना करियर शुरू करने वाले विजयवर्गीय पहले पार्षद, फिर महापौर और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव 1990 में इंदौर-4 से लड़ा था। इसके बाद उन्होंने तीन बार क्षेत्र क्रमांक 2 से, फिर दो बार महू से चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा में दस्तक देते रहे. इस तरह वह 6 बार विधायक चुने जा चुके हैं. ऐसे में इस बार पार्टी ने इन्हें चुनाव मैदान में उतारकर चुनावी लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है.

मुरैना जिले की दिमनी सीट से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मैदान में उतारकर बीजेपी ने इस सीट को हाईप्रोफाइल बना दिया है. उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस विधायक रवींद्र तोमर हैं. नरेंद्र सिंह तोमर की बात करें तो वह मुरैना लोकसभा सीट से दूसरी बार सांसद हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री भी हैं। नरेंद्र सिंह तोमर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी करीबी माने जाते हैं.

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