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दूषित पानी पीने से एक बच्चे की मौत, 125 लोग हुए बीमार

करौली. राजस्थान के करौली में दूषित पानी पीने के कारण मंगलवार को यहां एक मासूम बालक की मौत हो गई. वहीं बीमार होने वाले लोगों की संख्या 125 के पार पहुंच गई है. चिकित्सा विभाग ने शाहगंज, चौबे पाड़ा, पुरानी कचहरी और धाकड़ पोठा में कैंप लगाए और 200 से अधिक लोगों की जांच की. लोगों ने जलदाय विभाग के कर्मचारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. लोगों का आरोप है कि कर्मचारियों ने टंकी की एक दिन पहले सफाई की है और उस पर सफाई की दिनांक 14 अक्टूबर लिख दी है. कुछ लोगों ने कर्मचारियों पर सैम्पल लेकर फेंकने के भी आरोप लगाए हैं.

जानकारी के अनुसार हिंडौन के चौबे पाड़ा, दुब्बे पाड़ा, काना हनुमान पाड़ा, पाठक पाड़ा, जाट की सराय, गुलशन कॉलोनी और बाईपास सहित कई कॉलोनियों को जलदाय विभाग की ओर से एक ही टंकी से पेयजल आपूर्ति की जाती है. 4 दिन पहले दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण लोग उल्टी दस्त के शिकार होने लग गए. उसके बाद से यह सिलसिला लगातार चल रहा है. इन कॉलोनियों में अब तक करीब 125 से अधिक लोग उल्टी दस्त से पीडि़त हो चुके हैं.

वहीं दो दर्जन मरीजों को चिकित्सक ने गंभीर हालत में जयपुर रेफर किया है. हिंडौन के शाहगंज निवासी 12 वर्षीय देव कुमार पुत्र गिरधारी कोली को दूषित पानी पीने के कारण सोमवार रात को अचानक उल्टी दस्त शुरू हो गए. उसके बाद परिजन मंगलवार सुबह बालक को हिंडौन के जिला अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. बालक की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है. उसके बाद लोगों में जलदाय विभाग और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त हो गया.

लोगों को कहना है कि उन्होंने कई बार जलदाय विभाग और प्रशासन को दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायत की थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया. इससे मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती गई. लोगों का कहना है कि नलों से दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है. क्षेत्र में 50 वर्ष पुरानी पाइप लाइन है. टंकी की सफाई नहीं होने से लोगों के घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है. मामला बढ़ता देख विभाग के अभियंता मौके पर पहुंचे तो लोगों ने उनका घेराव किया और जमकर खरी-खोटी सुनाई.

जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ पुष्पेंद्र गुप्ता ने बताया कि पुरानी आबादी क्षेत्र में मेडिकल टीम भेजकर उपचार किया जा रहा है. इसके साथ ही कई स्थानों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे हैं. लगातार बढ़ रहे मरीजों के कारण अस्पताल के वार्ड भी फुल हो गए. शिशु वार्ड में भर्ती दर्जनभर बच्चों सहित दो दर्जन से अधिक रोगियों को रेफर किया गया है. जिला अस्पताल के बेड फुल होने के कारण मेडिकल पर शिशु वार्ड में एक पलंग पर दो से तीन मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है.
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